शिव महिम्न स्तोत्र

शिव महिम्न स्तोत्र क्या है?

शिव महिम्न स्तोत्र में समर्पण, प्रेम, ज्ञान, वैराग्य, व शक्ति का अद्भुत संगम है।

इसकी उत्पत्ति कब, कैसे और किन परिस्थितियों में की गयी। यह जानने की इच्छा होनी चाहिये।

इसमें शिव की अनंत महिमा का गुणगान किया गया है।

शिव के प्रति भक्ति का यह एक अद्वितीय स्त्रोत है।

इसका मूल संदेश शिव महिमा, उनका प्रेम, उनकी कृपा तथा उनके वास्तविक मंगलकारी स्वरूप से है।

मन को प्रस्सन करने वाला एक अलोकिक स्तोत्र है। इसमें दिये गये छंद भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं।

इस स्त्रोत के गायन से शिव अपने भक्तों पर शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं।

गन्धर्वराज पुष्पदन्त जो स्वयं एक उच्चकोटि का शिवभक्त था, ने प्रेम औऱ भक्ति से परिपूर्ण यह स्त्रोत लिखा था।

जो भगवान शिव को भी प्रसन्न करने वाला है।

सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाने वाला यह शिव महिम्न स्तोत्र आनंद से युक्त है।

इस स्त्रोत में महादेव के कालस्वरूप, शमशानरूपी सौंदर्य के बारे में बताया गया है।

बाहरी रूप से संसार में जो पदार्थ मनुष्य के लिये अनुकूल यानी मंगलकारी नहीं हैं, शुभ नहीं हैं,

उन पदार्थों का सेवन करने पर भी भगवान शिव जीवों के लिये अत्यंत शुभ एवं हितकारी हैं।

शैव और वैष्णव सम्प्रदायों के बीच उत्पन्न हुए अंतर को मिटाने के लिये इस स्तोत्र मैं भगवान विष्णु द्वारा

शिव की आराधना और भक्ति का बहुत ही मोहक वर्णन इस महिम्न स्तोत्र में किया गया है।

शिव महिम्न स्तोत्र

इसमें कहा गया है कि भगवान विष्णु प्रतिदिन नियम से एक सहस्त्र कमल के फूलों से भगवान शिव की पूजा आराधना करते हैं।

एक बार एक फूल कम हो जाने अपने नेत्रों को फूल की जगह भेंट करके फूलों की संख्या को पूरा रखते हैं।

यह स्तोत्र प्राचीनकाल से ही ऋषयों, मुनियों और देवताओं में समान रूप से पूजनीय है।

जो भी शुद्ध मन से प्रेम एवं भक्ति के द्वारा इस स्तोत्र का पाठ करता है निश्चित रूप से उसे शिव प्राप्त होते हैं।

यह स्तोत्र रात्रि के प्रथम प्रहर में किया जाता है।

हमारा मन विकारों से शुद्ध हो कर, निर्मलता को प्राप्त करता है।

इसमें भगवान शिव के निर्गुण और सगुणरूप की महिमा का गायन है। जिससे शिवमय होने की अनुभूति होती है।

ऐसा सुना जाता है कि पुष्पदन्त नाम का एक गन्धर्वों का राजा था, जो महादेव का परमभक्त था।

किन्तु एक भूल के कारण महादेव के क्रोध से अपनी शक्ति खो बैठा था, तब उसने भगवान शिव से क्षमा याचना की और शिव को प्रसन्न करने के लिये इस महानतम स्तोत्र की रचना करी।

पुष्पदन्त द्वारा रचित शिव महिम्न स्तोत्र अत्यंत लोकप्रिय है। यह शिव की कृपा और महिमा से भरा पड़ा है।

।। महेश्वर से बढ़ कर कोई देव नहीं है, महिम्न स्तोत्र से बढ़ कर अन्य कोई स्तुति नहीं है, प्रणव मंत्र (ॐ) से बढ़ कर कोई मंत्र नहीं है और ‘ गुरू से श्रेष्ठ कोई तत्व नहीं है ‘ ।।

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